Indra Kant

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की मांग लूंगा उन से।

| | मैं मंदिर गया की मांग लूंगा कुछ भगवान से की मेरी नज़र गई एक मांगने वाले पर मैंने उसकी हथेली में झाँका। ज़िन्दगी में मैने जिसकी नहीं की कभी कदर नहीं की परवाह, मैंने उसकी हथेली में कुछ चंद सिक्का देख लिया। | |

| | मैं मस्जिद गया की मांग लूंगा कुछ ख़ुदा से की मेरी नज़र गई एक मांगने वाले पर मैंने उसकी हथेली में झाँका। ज़िन्दगी में मैंने जिसकी नहीं की कभी कदर नहीं की परवाह, मैंने उसकी हथेली में कुछ रोटी के टुकड़े देख लिया। | |

| | मैं गिरजाघर गया की मांग लूंगा कुछ गॉड से की मेरी नज़र गई एक मांगने वाले पर मैंने उसकी हथेली में झाँका। ज़िन्दगी में मैंने जिसकी नहीं की कभी कदर नहीं की परवाह, मैंने उसकी हथेली में कुछ किताब के पने देख लिया। | |

-- इन्द्र कान्त